गुजार दी रात

शायरी की डायरी से…




गुजार दी रात इसी सोच में हमने।

कि नई सुबह तेरे दीदार से शुरू होगी।

नफरतों की बातें ही होती रही थी अब तक।

कि बात अब तेरे प्यार से शुरू होगी।

शिकवे,शिकायतें कर बड़ा रुसवा किया तुमने।

कि कोई तो आरजू तेरे ऐतबार से शुरू होगी।

मुलाकातों का सिलसिला चलता था कभी।

क्या पता था कि शब अब तेरे इंतजार से शुरू होगी।

इनकार सुनना भी गंवारा क्यों करे आपका ।

जब उम्मीद है कि बात तेरे इकरार से शुरू होगी।

 

रात और रात की तन्हाई गजलों,कविताओं व शायरी की दुनिया में अहम जगह रखती है। ऐसे कई शायर और गजलकार है जिन्होंने अपने प्रिय की यादों में रातें गुजार दी और उसकी जुदाई को बड़े ही जज्बाती तरीके से कागज पर उतार दिया।

फौजीया शेख्,नागपुर.


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